Wednesday, 1 July 2020

पुण्यतिथि १/७/२०२०स्वर्गीय , नीलकंठ देसाई (संत)आज उनकी पुण्यतिथि में निर्धन को अपनी यथा शक्ति के द्वारा अन्न वस्त्र धन ब्राह्मण भोज दियानीलकंठ महाराज भगवान शिव के भक्त थे हिन्दुस्तान के काफी मंदिरों में उनका आना जाना हो लगा रहता था बचपन में महातमा नीलकंठ के पिताश्री भाई शंकर देसाई भी भगवान शिव के भक्त थे इसी लिए उनका नाम नीलकंठ नामकरण किया था इसी कारण उनका संन्यास जीवन था विवाह नहीं किया मोह माया से दूर वैराग्य जीवन अपना रक्खा था हिंदुस्तान के चारों धामों की यात्रा की थी इडर गांव में बाबा श्याम सुन्दर दास का आश्रम जो गुजरात में हैं । और अमरेली के वनों में गांव लोथपुर में शक्ति आश्रम बाबा भोलेनाथ भूतनाथ का मन्दिर हैं सौराष्ट्र में वहां तप के लिए आना जाना था अन्तिम समय में महात्मा नीलकंठ ने भूतनाथ मन्दिर में ७४ की अवस्था प्राण त्याग दिए मोक्ष की प्राप्ति हुई दत्तक पुत्री मयूरी प्राण शंकर देसाई दामाद विजय माथुर , पुत्र , पुत्री महान ,यशस्वी हम सभी लोगों की उपस्थिति में महात्मा नीलकंठ का दास संस्कार हुआ और वो पंच तत्वों में विलीन हो गए वहा देख भाल में भाई की लड़की को अधिकार दे रक्खे थे उनकी एक छोटी सी खोली ८बाई ८की आज भी है बैंक खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बोरीवली ईस्ट में हैं नीलकंठ देसाई जी ने अपनी भतीजी वह दामाद को जीते जी वारिस घोषित कर दिया था सगे संबंधियों से मिलना जुलना न के बराबर था जबसे उन्होंने संन्यास लिया थास्थाई पता रूम नं ६ लालजी नान जी चाल , दत्त पांडा रोड सामने जे, बी, खोत स्कूल बोरीवली ईस्ट ४०००६६

पुण्यतिथि १/७/२०२०
स्वर्गीय , नीलकंठ देसाई (संत)

आज उनकी पुण्यतिथि  में निर्धन  को अपनी यथा शक्ति के द्वारा अन्न वस्त्र धन ब्राह्मण भोज दिया
नीलकंठ महाराज  भगवान शिव के भक्त  थे हिन्दुस्तान के काफी मंदिरों में उनका आना जाना हो लगा रहता था  बचपन में महातमा नीलकंठ के पिताश्री भाई शंकर देसाई भी भगवान शिव के भक्त थे इसी लिए उनका नाम नीलकंठ नामकरण किया था इसी कारण उनका संन्यास जीवन था विवाह नहीं किया मोह माया से दूर वैराग्य जीवन अपना रक्खा था हिंदुस्तान के चारों धामों की यात्रा की थी इडर गांव में बाबा श्याम सुन्दर दास का आश्रम जो गुजरात में हैं । और अमरेली के वनों में गांव लोथपुर में शक्ति आश्रम बाबा भोलेनाथ भूतनाथ का मन्दिर हैं सौराष्ट्र में वहां तप के लिए आना जाना था अन्तिम समय में महात्मा नीलकंठ   ने भूतनाथ मन्दिर में ७४ की अवस्था प्राण त्याग दिए मोक्ष की प्राप्ति हुई  दत्तक पुत्री मयूरी प्राण शंकर देसाई  दामाद विजय माथुर , पुत्र , पुत्री महान ,यशस्वी हम सभी लोगों की उपस्थिति में महात्मा नीलकंठ का दास संस्कार हुआ और वो पंच तत्वों में विलीन हो गए वहा देख भाल में भाई  की लड़की को अधिकार दे रक्खे थे  उनकी एक छोटी सी खोली ८बाई ८की आज भी है बैंक खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बोरीवली ईस्ट में हैं नीलकंठ देसाई जी ने अपनी भतीजी वह दामाद को जीते जी वारिस घोषित कर दिया था सगे संबंधियों से मिलना जुलना न के बराबर था जबसे उन्होंने संन्यास लिया था
स्थाई पता रूम नं ६ लालजी नान जी चाल , दत्त पांडा रोड सामने जे, बी, खोत स्कूल बोरीवली ईस्ट ४०००६६

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